Chapter 5 मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया Print Culture and the Modern World Class 10 NCERT History

 

Discover the evolution of printing culture and its impact on
society, literacy, and nationalism in this insightful chapter In Hindi.

Chapter 5 मुद्रण संस्कृति और
आधुनिक दुनिया
Print Culture and the Modern World

Class 10 NCERT History Solutions in Hindi: भारत और समकालीन
विश्व
-2

Updated for 2024-2025 Exams

Concept Map:


1. छपाई की प्रगति (Progress of Printing)

·       कागज का आविष्कार
कागज का सबसे पहले
आविष्कार चीन में हुआ।

Invention of Paper: Paper was first invented in China.

·       मूवेबल टाइप प्रिंटिंग
यूरोप में मूवेबल
टाइप प्रिंटिंग ने पुस्तकों के उत्पादन को क्रांतिकारी बना दिया।

Moveable Type Printing: In Europe, moveable type printing
revolutionized book production.


2. भारत में छपाई का विकास (Development of
Printing in India)

·       भारत में छपाई मशीन का आगमन
गोवा में सबसे पहले
छपाई मशीन का आगमन हुआ।

Arrival of Printing Press in India: The printing press first arrived
in Goa.

·       मिशनरियों की भूमिका
ईसाई मिशनरियों ने
छपाई के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Role of Missionaries: Christian missionaries played a significant role
in spreading printing.


3. छपाई से सांस्कृतिक परिवर्तन (Cultural
Shifts Due to Printing)

·       ज्ञान की पहुँच
छपाई के कारण
पुस्तकें अधिक लोगों के लिए सुलभ हो गईं।

Access to Knowledge: Books became more accessible to a larger
population due to printing.

·       विचारों का प्रसार
छपाई ने धार्मिक और
राजनीतिक विचारों के व्यापक प्रसार को सक्षम बनाया।

Spread of Ideas: Printing enabled the widespread dissemination of
religious and political ideas.


4. समाज पर प्रभाव (Impact on Society)

·       साक्षरता और शिक्षा
मुद्रित सामग्री की
उपलब्धता से साक्षरता दर में बढ़ोतरी हुई।

Literacy and Education: The availability of printed materials
increased literacy rates.

·       सामाजिक सुधार
सुधारवादी विचारों के
प्रसार में छपाई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Social Reforms: Printing played a crucial role in the spread of
reformist ideas.

प्रश्न 1:

छपाई तकनीक के विकास पर
प्रकाश डालिए।

उत्तर:
छपाई तकनीक का विकास
सबसे पहले चीन में हुआ। कागज का आविष्कार और बाद में मूवेबल टाइप प्रिंटिंग का
विकास यूरोप में हुआ
, जिससे
पुस्तकों का उत्पादन अधिक तेज़ी से और सस्ते में होने लगा।


प्रश्न 2:

भारत में छपाई के प्रसार
में मिशनरियों की क्या भूमिका रही
?

उत्तर:
भारत में छपाई के
प्रसार में मिशनरियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने गोवा में सबसे पहले छपाई
मशीन लाई और भारतीय भाषाओं में धार्मिक पुस्तकों को छापा
, जिससे छपाई का प्रसार हुआ।


प्रश्न 3:

छपाई तकनीक से भारतीय
समाज पर क्या प्रभाव पड़ा
?

उत्तर:
छपाई तकनीक के कारण
समाज में बड़े पैमाने पर साक्षरता बढ़ी
, लोगों को ज्ञान सुलभ हुआ, और समाज सुधार आंदोलनों को बल मिला।
सुधारवादी विचारों का प्रसार हुआ और लोगों में जागरूकता बढ़ी।


प्रश्न 4:

भारत में छपाई से साहित्य
और संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ा
?

उत्तर:
भारत में छपाई के
कारण साहित्य और संस्कृति पर बड़ा प्रभाव पड़ा। इससे विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें
छपने लगीं
, जिससे
साहित्यिक विकास को बल मिला। धार्मिक और सामाजिक विषयों पर बहस शुरू हुई और भारतीय
संस्कृति का पुनर्जागरण हुआ।

1. निम्नलिखित के कारण बताइए:

(d) वूड
ब्लाक या तख्ति की छपाई यूरोप में
1295 के बाद शुरू हुई।
उत्तर: वूड ब्लाक या तख्ति की तकनीक 1295
के बाद यूरोप में आई,
जिससे किताबों का
उत्पादन प्रारंभ हुआ। इसके बाद
, किताबों
की छपाई की तकनीक में सुधार हुआ
, जिससे
बड़े पैमाने पर पुस्तक उत्पादन संभव हुआ। इस तकनीक के आने से पहले
, किताबों को हाथ से लिखा जाता था,
जो बहुत समय लेने
वाला और महंगा काम था।

([k) मार्टिन
लूथर छपाई के समर्थक थे और उन्होंने इसके माध्यम से सुधारों का प्रचार किया।

उत्तर: मार्टिन लूथर छपाई के समर्थक थे और
उन्होंने इसके माध्यम से अपने धार्मिक सुधारों और विचारों का व्यापक प्रचार किया।

(x) रोमन
कैथोलिक चर्च ने सोलहवीं शताब्दी के मध्य से प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची बनानी
शुरू की।

उत्तर: रोमन कैथोलिक चर्च ने सोलहवीं शताब्दी
के मध्य से
इंडेक्स
लिबरम प्रोहिबिटोरम
नामक
सूची तैयार की
, जिन
पुस्तकों पर चर्च के अनुयायियों द्वारा पढ़ने पर प्रतिबंध था।

(?k) महात्मा
गांधी ने कहा कि स्वतंत्रता और न्याय के लिए अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से
संघर्ष किया जाना चाहिए।

उत्तर: महात्मा गांधी ने कहा कि स्वतंत्रता की
लड़ाई न्याय
, सत्य
और अहिंसा पर आधारित होनी चाहिए
, और
इसके लिए हर इंसान को संघर्ष करना होगा।


2. संक्षेप में इनके बारे में लिखिए:

(d) गुटेनबर्ग
प्रेस

उत्तर: गुटेनबर्ग प्रेस वह मशीन थी, जिसने पहली बार बड़े पैमाने पर पुस्तकों
के मुद्रण को संभव बनाया
, जिससे
ज्ञान का व्यापक प्रसार हुआ।

([k) पुस्तक
को लेकर एरास्मस के विचार

उत्तर: एरास्मस का मानना था कि ज्ञान सभी के
लिए सुलभ होना चाहिए
, और
पुस्तकें मानवता की प्रगति का सबसे बड़ा साधन हैं। उन्होंने पुस्तकों के माध्यम से
शिक्षा का प्रचार किया।

(x) वन्यजीव
संरक्षण या नेचर प्रेस एक्ट

उत्तर: यह अधिनियम प्राकृतिक संसाधनों और
वन्यजीवों की रक्षा के लिए था
, जो
प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के महत्व को समझाने के लिए पारित किया गया था।


3. उन्नीसवीं सदी में भारत में छपाई-संस्कृति के
विस्तार का इनके लिए क्या महत्व था:

(d) महिलाएं
उत्तर: छपाई संस्कृति ने महिलाओं के लिए शिक्षा
और साक्षरता के नए अवसर खोले। इससे महिलाएं सामाजिक सुधार आंदोलनों में भाग लेने
लगीं और उनमें राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ी।

([k) खड़ी
जनता

उत्तर: उन्नीसवीं सदी में छपाई के कारण आम जनता
के लिए शिक्षा और सूचना सुलभ हो गई। इससे वे राजनीतिक
, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को समझने
लगे और समाज में उनका योगदान बढ़ा।

(x) सुधारक
उत्तर: सुधारकों ने छपाई का उपयोग सुधारवादी
विचारों के प्रसार के लिए किया। इससे समाज में सामाजिक सुधार और परिवर्तन की लहर
दौड़ी
, और लोग अधिक जागरूक
होने लगे।

1. व्बरहवीं सदी के यूरोप में कुछ लोगों को क्यों
ऐसा लगता था कि छपाई संस्कृति से अराजकता का अंत और ज्ञान का उदय होगा
?

उत्तर:
व्बरहवीं सदी के
यूरोप में कुछ लोगों को यह विश्वास था कि छपाई संस्कृति से विचारों का प्रसार बड़े
पैमाने पर होगा
, जिससे
लोगों तक सही जानकारी पहुँचेगी और सामाजिक तथा धार्मिक अराजकता का अंत होगा। छपाई
ने जानकारी और शिक्षा को सुलभ बनाया
, जिससे ज्ञान का उदय हुआ और लोगों के बीच नई जागरूकता आई।


2. कुछ लोग पुस्तकों की सुलभता को लेकर चिंतित
क्यों थे
? यूरोप
और भारत से एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:
कुछ लोग पुस्तकों की
सुलभता को लेकर इसलिए चिंतित थे क्योंकि वे मानते थे कि किताबों का अधिक प्रसार
गलत विचारधाराओं और सामाजिक उथल-पुथल को बढ़ावा दे सकता है। यूरोप में
, कैथोलिक चर्च ने इंडेक्स लिबरम प्रोहिबिटोरम‘ (प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची) जारी की
थी
, जिससे वे किताबें
प्रतिबंधित कर दी गईं जो चर्च के विचारों से मेल नहीं खाती थीं। भारत में
, औपनिवेशिक सरकार ने कई राष्ट्रीयतावादी
लेखकों की किताबों पर प्रतिबंध लगाया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह को
बढ़ावा दे रही थीं।


3. उन्नीसवीं सदी में भारत में खड़ी जनता पर छपाई
संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ा
?

उत्तर:
उन्नीसवीं सदी में
भारत में छपाई संस्कृति के कारण खड़ी जनता में साक्षरता का स्तर बढ़ा। छपाई के
माध्यम से किताबें
, समाचार
पत्र
, और पत्रिकाएं आसानी
से उपलब्ध हो गईं
, जिससे
लोग राजनीति
, समाज
और सांस्कृतिक मुद्दों पर अधिक जागरूक हुए। इसने राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी और
भारतीय समाज में सुधारों के लिए नई सोच विकसित की।


4. छपाई संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास
में क्या सहायता की
?

उत्तर:
छपाई संस्कृति ने
भारत में राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुस्तकों
, समाचार पत्रों, और पत्रिकाओं के माध्यम से स्वतंत्रता,
समानता, और सामाजिक न्याय जैसे विचार बड़े
पैमाने पर फैले। राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े नेताओं और सुधारकों ने अपने विचारों को
छपाई के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाया
, जिससे भारत के स्वतंत्रता संग्राम को बल मिला। उदाहरण के लिए,
बाल गंगाधर तिलक ने केसरीअखबार का उपयोग ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनमत
तैयार करने में किया।

प्रश्न:
पिछले साठ वर्षों
में छपाई संस्कृति में कई अन्य बदलावों का पता चला। फिर इनके बारे में यह बताते
हुए लिखा गया कि ये क्यों हुए और इनके कौन से परिणाम हुए
?

उत्तर:
पिछले साठ वर्षों
में छपाई संस्कृति में डिजिटल क्रांति
, इंटरनेट और ई-बुक्स जैसी तकनीकों के आगमन से बड़े बदलाव आए।
ये बदलाव इसलिए हुए क्योंकि तकनीकी प्रगति के कारण छपाई सस्ती और अधिक सुलभ हो गई।
डिजिटल माध्यमों के आने से किताबें
, पत्रिकाएं, और अन्य सामग्री
ऑनलाइन उपलब्ध हो गईं
, जिससे पारंपरिक मुद्रण का स्थान ई-बुक्स
और डिजिटल पढ़ाई ने ले लिया। इसके परिणामस्वरूप
, लोगों तक जानकारी तेजी से और आसानी से पहुँचने लगी, जिससे साक्षरता और ज्ञान का प्रसार तेज
हो गया।

 

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