Chapter 5: उपभोक्ता अधिकार (Consumer Rights) Class 10 NCERT Economics

 

यह अध्याय भारतीय
उपभोक्ता अधिकारों
, उनकी सुरक्षा और
बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उपभोक्ता संरक्षण पर गहराई से चर्चा करता है।

Chapter 5: उपभोक्ता अधिकार (Consumer Rights)

Class 10 NCERT Economics – आर्थिक विकास की समझ | Questions
Answers

Updated for 2024-2025 Exams

उपभोक्ता अधिकार और सुरक्षा

1. उपभोक्ता अधिकार

  • सूचना का
    अधिकार
    : उपभोक्ता को
    खरीदी गई वस्तु या सेवा के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।
  • चुनाव का
    अधिकार
    : उपभोक्ता को
    विभिन्न विकल्पों में से चयन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
  • सुनवाई का
    अधिकार
    : उपभोक्ता को
    अपनी शिकायत दर्ज कराने और सुनवाई पाने का अधिकार है।
  • सुरक्षा का अधिकार: उपभोक्ता को ऐसी वस्तुओं और सेवाओं
    से सुरक्षा दी जानी चाहिए जो स्वास्थ्य या जीवन के लिए खतरा बन सकती हैं।
  • न्याय का
    अधिकार
    : उपभोक्ता को
    दोषपूर्ण वस्तुओं या सेवाओं के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजा पाने का अधिकार
    है।

2. उपभोक्ता संरक्षण कानून

  • उपभोक्ता संरक्षण
    अधिनियम (
    COPRA): उपभोक्ता की सुरक्षा और उनके
    अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया कानून।
  • उपभोक्ता
    अदालतें
    : जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर
    उपभोक्ता न्यायालय
    , जहां
    उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।

3. उपभोक्ता शिकायतें

  • वस्तु की गुणवत्ता: वस्तु की अपेक्षित गुणवत्ता न होने
    पर उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • सेवा की कमी: यदि सेवा समय पर या सही तरीके से
    प्रदान नहीं की जाती
    , तो शिकायत
    दर्ज की जा सकती है।
  • अतिरिक्त
    मूल्य वसूली
    : वस्तु या
    सेवा के लिए निर्धारित से अधिक कीमत वसूलने पर उपभोक्ता शिकायत कर सकते हैं।

4. उपभोक्ता संरक्षण के उपाय

  • COPRA का क्रियान्वयन: उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और
    जागरूकता फैलाने के लिए लागू किया गया।
  • विज्ञापन
    निगरानी
    : भ्रामक
    विज्ञापनों पर प्रतिबंध और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना।
  • उपभोक्ता
    संगठन
    : उपभोक्ता
    संगठन उपभोक्ताओं की सहायता और उन्हें जागरूक करने का कार्य करते हैं।

5. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उपभोक्ता

  • उपभोक्ताओं
    पर प्रभाव
    : बहुराष्ट्रीय
    कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले उत्पाद और सेवाओं का उपभोक्ताओं पर सकारात्मक
    और नकारात्मक प्रभाव।
  • उपभोक्ता जागरूकता: उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और
    कंपनियों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।

6. भविष्य की चुनौतियाँ

  • डिजिटल
    उपभोक्ता अधिकार
    : इंटरनेट और
    ई-कॉमर्स के विकास के साथ उपभोक्ताओं के अधिकारों का विस्तार।
  • उपभोक्ता
    अधिकारों की जागरूकता
    : ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में उपभोक्ता जागरूकता की
    कमी।

प्रश्न 1: उपभोक्ता अधिकार क्या होते हैं?

उत्तर: उपभोक्ता अधिकार वह अधिकार होते हैं जो
उपभोक्ताओं को उनके उत्पाद या सेवा से जुड़े किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी
, गलत जानकारी या गुणवत्ता में कमी से बचाते
हैं। इन अधिकारों के अंतर्गत उपभोक्ताओं को जानकारी प्राप्त करने
, उचित मूल्य पर अच्छी गुणवत्ता का सामान
खरीदने और शिकायत दर्ज करने का अधिकार मिलता है।

प्रश्न 2: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) कब लागू हुआ था?

उत्तर: भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) 1986 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना
था।

प्रश्न 3: उपभोक्ता किस स्थिति में शिकायत कर सकते हैं?

उत्तर: उपभोक्ता उस स्थिति में शिकायत कर सकते
हैं जब उन्हें खरीदे गए उत्पाद या सेवा में कोई दोष दिखाई दे
, वस्तु या सेवा की गुणवत्ता खराब हो, या उन्हें उचित जानकारी प्रदान नहीं की
गई हो। इसके अतिरिक्त
, यदि उत्पाद पर उल्लिखित मूल्य से अधिक
चार्ज किया गया हो या अनुचित व्यावसायिक व्यवहार का सामना करना पड़ा हो
, तब भी उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

प्रश्न 4: उपभोक्ता अदालतों की संरचना क्या होती है?

उत्तर: उपभोक्ता अदालतों की तीन-स्तरीय संरचना
होती है:

  1. जिला
    उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (
    District Consumer Forum)यह एक करोड़ तक के विवादों को सुनती
    है।
  2. राज्य
    उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (
    State Consumer Forum)एक करोड़ से 10 करोड़ तक के विवादों की सुनवाई करती
    है।
  3. राष्ट्रीय
    उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (
    National Consumer Forum) – 10 करोड़ से अधिक के विवादों की सुनवाई
    करती है।

प्रश्न 5: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को क्या अधिकार
मिलते हैं
?

उत्तर: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत
उपभोक्ताओं को निम्नलिखित अधिकार मिलते हैं:

  1. वस्तु और
    सेवा से संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
  2. किसी उत्पाद
    या सेवा में दोष होने पर उसकी शिकायत करने का अधिकार।
  3. अनुचित व्यापारिक
    गतिविधियों से बचने का अधिकार।
  4. गुणवत्तापूर्ण
    उत्पाद और सेवा प्राप्त करने का अधिकार।
  5. उपभोक्ता
    अदालत में अपनी शिकायत को पेश करने और न्याय प्राप्त करने का अधिकार।

प्रश्न 6: उपभोक्ता आंदोलन का उद्देश्य क्या होता है?

उत्तर: उपभोक्ता आंदोलन का उद्देश्य उपभोक्ताओं
के हितों की रक्षा करना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। यह
आंदोलन उपभोक्ताओं को गलत और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से बचाने के लिए काम
करता है।

प्रश्न 7: उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की जा सकती
है
?

उत्तर: उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर
उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है। यदि उपभोक्ता की शिकायत सत्य पाई
जाती है
, तो उन्हें मुआवजा या दोषपूर्ण उत्पाद की
अदला-बदली की जा सकती है। साथ ही
, दोषी व्यवसायी या
सेवा प्रदाता पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

प्रश्न 8: उपभोक्ताओं को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

उत्तर: उपभोक्ताओं को निम्नलिखित सावधानियां
बरतनी चाहिए:

  1. किसी भी
    उत्पाद या सेवा की खरीदारी से पहले उसकी गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी अवश्य
    प्राप्त करें।
  2. खरीदारी के
    समय बिल या रसीद अवश्य लें।
  3. अनुचित विज्ञापन
    या छूट से बचें और हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदारी करें।

प्रश्न 1:

बाजार में नियमों
और विनियमों की आवश्यकता क्यों होती है
? कुछ उदाहरणों के साथ समझाइए।

उत्तर:
बाजार में नियमों
और विनियमों की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि यह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा
करते हैं और व्यवसायों को ईमानदारी से काम करने के लिए बाध्य करते हैं। बिना
नियमों के
, उपभोक्ता अनुचित व्यापारिक गतिविधियों, धोखाधड़ी, और खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों का सामना कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर
, मापदंड तय करना (जैसे न्यूनतम गुणवत्ता
मानक)
, गलत विज्ञापन पर रोक लगाना, और सामान की उचित कीमत सुनिश्चित करना।
ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि उपभोक्ता को सही जानकारी मिले और वे अपने अधिकारों
का सही उपयोग कर सकें।

प्रश्न 2:

भारत में उपभोक्ता
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई
? इसके विकास के बारे में जानकारी दें।

उत्तर:
भारत में उपभोक्ता
आंदोलन की शुरुआत
1960 के दशक में हुई जब भोजन, तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की गुणवत्ता
में गिरावट के कारण उपभोक्ता असंतोष बढ़ा। इसके बाद
1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) लागू किया गया, जिसने उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की
रक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान किया। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को
धोखाधड़ी
, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और
असंतोषजनक सेवाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।

प्रश्न 3:

दो उदाहरण देकर
उपभोक्ता जागरूकता के महत्व को बताएं।

उत्तर:

  1. जब एक
    व्यक्ति ने बाजार से मोबाइल फोन खरीदा और पाया कि यह कंपनी द्वारा बताए गए
    फीचर्स से मेल नहीं खाता
    , तो उसने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज की। उसे न्याय
    मिला और कंपनी को फोन बदलने के लिए कहा गया।
  2. एक महिला ने
    खराब गुणवत्ता वाले खाद्य तेल की शिकायत की
    , जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ा। उसके द्वारा की गई
    शिकायत के बाद बाजार से उस तेल को हटा दिया गया और कंपनी पर जुर्माना लगाया
    गया।

प्रश्न 4:

उपभोक्ताओं का
शोषण किन कारणों से होता है
? उन कारणों की चर्चा करें।

उत्तर:
उपभोक्ताओं का
शोषण कई कारणों से होता है
, जैसे:

  1. उपभोक्ताओं
    को उनके अधिकारों की जानकारी न होना।
  2. व्यापारियों
    द्वारा गलत और भ्रामक विज्ञापन।
  3. उत्पाद की
    गुणवत्ता को लेकर गलत जानकारी देना।
  4. अनुचित
    व्यापारिक गतिविधियों जैसे— अधिक कीमत लेना
    , वजन या माप में धोखाधड़ी करना आदि।

प्रश्न 5:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 का गठन क्यों किया गया?

उत्तर:
उपभोक्ता संरक्षण
अधिनियम
, 1986 का गठन इसलिए किया गया क्योंकि
उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बचाने के लिए एक कानूनी
ढांचे की आवश्यकता थी। इसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की जानकारी
, शिकायत करने की प्रक्रिया, और न्याय प्राप्त करने की व्यवस्था
प्रदान की गई। यह अधिनियम उपभोक्ताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है
जिसमें वे अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें।

प्रश्न 6:

अपने क्षेत्र के
बाजार में उपभोक्ताओं के व्यवहार का वर्णन करें।

उत्तर:
मेरे क्षेत्र में
उपभोक्ता जागरूकता बढ़ रही है। लोग अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं और उत्पादों की
खरीदारी करते समय बिल लेना सुनिश्चित करते हैं। उदाहरण के लिए
, कई उपभोक्ता अब उत्पाद की MRP की जांच करते हैं और दुकानदार से मोलभाव
करने से पहले उचित जानकारी प्राप्त करते हैं। हाल ही में
, कई उपभोक्ताओं ने खाद्य पदार्थों में
मिलावट की शिकायत दर्ज कराई
, जिससे कई दुकानों
पर छापेमारी की गई।

प्रश्न 7:

उपभोक्ताओं द्वारा
इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्रमुख शब्द और संकेत कौन से होते हैं और उन्हें क्यों
देखा जाता है
?

उत्तर:
जब उपभोक्ता कोई
महंगा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदते हैं
, तो वे “वॉरंटी” और “गारंटी” जैसे
शब्दों पर अधिक ध्यान देते हैं। साथ ही
, खाद्य उत्पादों में लोग “एफएसएसएआई” (FSSAI) मार्क की जांच करते हैं, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित हो
सके। इसके अलावा
, कई उपभोक्ता उत्पाद पर लिखे
“मूल्य” और “निर्माण तिथि” को भी देखते हैं।

प्रश्न 8:

भारत में
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं
?

उत्तर:
भारत में
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (
1986, संशोधित 2019) लागू किया गया है। इसके तहत, उपभोक्ता धोखाधड़ी, गलत विज्ञापन, और खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों से बच सकते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को “सूचना का अधिकार
अधिनियम” (
RTI Act) के तहत भी अपने अधिकारों की जानकारी
प्राप्त करने का अधिकार है।

प्रश्न 9:

उपभोक्ताओं के
कौन-कौन से अधिकार होते हैं
? हर अधिकार पर एक-एक वाक्य लिखें।

उत्तर:
उपभोक्ताओं को
निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:

  1. जानकारी
    प्राप्त करने का अधिकार
    : उत्पाद या सेवा से संबंधित पूरी जानकारी।
  2. सुरक्षित और
    गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पाने का अधिकार
  3. शिकायत दर्ज
    करने और मुआवजा पाने का अधिकार
  4. अनुचित
    व्यापारिक गतिविधियों से बचने का अधिकार
  5. उचित मूल्य
    पर उत्पाद प्राप्त करने का अधिकार
  6. शिकायत दर्ज
    करने की प्रक्रिया और सुनवाई का अधिकार
  7. उपभोक्ता
    शिक्षा का अधिकार

प्रश्न 10:

उपभोक्ता अपनी
अद्वितीयता और सशक्तिकरण कैसे दिखा सकते हैं
?

उत्तर:
उपभोक्ता अपनी
अद्वितीयता दिखाने के लिए अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं
, जैसे— सही जानकारी प्राप्त करना, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का विरोध
करना
, और यदि कोई समस्या हो तो न्याय पाने के
लिए अदालत में शिकायत दर्ज कराना। उदाहरण के लिए
, एक उपभोक्ता गलत विज्ञापन का शिकार होने पर अदालत में
शिकायत कर सकता है और मुआवजा पा सकता है।

प्रश्न 11:

भारत में उपभोक्ता
आंदोलन की प्रगति का विश्लेषण करें।

उत्तर:
भारत में उपभोक्ता
आंदोलन ने काफी प्रगति की है।
1986 में उपभोक्ता
संरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद
, उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ी है और वे अपने अधिकारों के
प्रति अधिक सतर्क हो गए हैं। उपभोक्ता अदालतों की संख्या भी बढ़ी है और अब
उपभोक्ता अपनी शिकायतों को अधिक आसानी से दर्ज करा सकते हैं। कई संगठनों और सरकारी
प्रयासों ने उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत किया है।

प्रश्न 12:

निम्नलिखित
मुद्दों पर विचार करें:

  1. उत्पाद के
    मुद्दे
  2. ऑनलाइन
    सेवाओं से संबंधित मुद्दे
  3. खाद्य
    पदार्थों में मिलावट

उत्तर:

  1. उत्पाद के
    मुद्दे
    : उत्पाद की
    गुणवत्ता
    , एक्सपायरी
    डेट और सही जानकारी की कमी।
  2. ऑनलाइन
    सेवाओं से संबंधित मुद्दे
    : कई उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी का सामना
    करना पड़ता है।
  3. खाद्य
    पदार्थों में मिलावट
    : खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री
    उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरे में डालती है।



 

 

 

 

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