इस अध्याय 4 में औद्योगीकरण, उसके प्रभाव, तकनीकी विकास, और वैश्विक व्यापार में बदलाव की चर्चा की गई
है। Class 10 NCERT History in Hindi
Chapter 4 वैश्विकरण और आर्थिक
विकास Globalization and Economic Development
Class 10 NCERT History Solutions in Hindi: भारत और समकालीन
विश्व -2
Updated for 2024-2025 Exams
Concept Map: Industrialization (औद्योगीकरण)
- Industrialization and Technological Advancements (औद्योगीकरण और प्रौद्योगिकी प्रगति)
- The
chapter discusses the development of industries and the role of new
technologies in accelerating production. - अध्याय में उद्योगों के विकास और उत्पादन
को गति देने में नई तकनीकों की भूमिका पर चर्चा की गई है।
- Pre-Industrial Era (औद्योगिक युग से पूर्व)
- Before
industrialization, production was primarily home-based, with people
working on small scales. - औद्योगीकरण से पहले उत्पादन मुख्यतः घरों
में होता था, और लोग
छोटे स्तर पर काम करते थे।
- Rise of Factories (कारखानों का उदय)
- The
establishment of factories marked the beginning of mass production, with
a shift from manual labor to machine-based production. - कारखानों की स्थापना ने बड़े पैमाने पर
उत्पादन की शुरुआत की, जिसमें
श्रम से मशीन आधारित उत्पादन की ओर परिवर्तन हुआ।
- Labor and Migration (श्रम और प्रवासन)
- Industrialization
led to mass migration as people moved to cities for better work
opportunities, often under harsh conditions. - औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने
पर प्रवासन हुआ क्योंकि लोग बेहतर काम के अवसरों की तलाश में शहरों की ओर
बढ़े, हालांकि
काम करने की स्थिति कठोर थी।
- Impact on Global Trade (वैश्विक व्यापार पर प्रभाव)
- Industrialization
also influenced global trade by creating a demand for raw materials from
colonies and increased the export of manufactured goods. - औद्योगीकरण ने वैश्विक व्यापार को भी
प्रभावित किया, जिसमें
उपनिवेशों से कच्चे माल की मांग बढ़ी और निर्मित वस्तुओं का निर्यात बढ़ा।
- Colonial Exploitation (औपनिवेशिक शोषण)
- Colonial
powers exploited resources and labor in their colonies to fuel industrial
growth in their home countries. - उपनिवेशवादी शक्तियों ने अपने उपनिवेशों
में संसाधनों और श्रम का शोषण किया ताकि उनके देश में औद्योगिक विकास हो
सके।
- Social and Economic Changes (सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन)
- Industrialization
brought about significant social and economic changes, such as
urbanization, the rise of a working class, and changes in social
structures. - औद्योगीकरण ने महत्वपूर्ण सामाजिक और
आर्थिक परिवर्तन लाए, जैसे
शहरीकरण, श्रमिक
वर्ग का उदय, और
सामाजिक ढांचे में परिवर्तन।
- Environmental Impact (पर्यावरणीय प्रभाव)
- Industrialization
also had adverse environmental effects, such as pollution and the overuse
of natural resources. - औद्योगीकरण का पर्यावरण पर भी प्रतिकूल
प्रभाव पड़ा, जैसे
प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1:
औद्योगीकरण
का क्या अर्थ है और इसका महत्व क्या है?
उत्तर:
औद्योगीकरण का अर्थ
है उत्पादन प्रक्रिया में मशीनीकरण और बड़े पैमाने पर उत्पादन की शुरुआत। यह
प्रक्रिया विभिन्न उद्योगों के विकास और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से जुड़ी होती
है। औद्योगीकरण ने आर्थिक विकास को गति दी और समाज में महत्वपूर्ण बदलाव लाए,
जैसे कि शहरों की
वृद्धि और श्रमिक वर्ग का उदय।
प्रश्न 2:
पूर्व-औद्योगिक
समाज किस प्रकार का था?
उत्तर:
पूर्व-औद्योगिक समाज
में उत्पादन छोटे स्तर पर होता था, जिसमें
अधिकांश लोग कृषि और हस्तशिल्प पर निर्भर थे। वस्त्र उत्पादन जैसे कार्य घरों में
किया जाता था और औद्योगिक युग से पहले बड़े कारखाने नहीं थे।
प्रश्न 3:
औद्योगिक
क्रांति से पहले वैश्विक व्यापार किस प्रकार का था?
उत्तर:
औद्योगिक क्रांति से
पहले वैश्विक व्यापार सीमित था और ज्यादातर कृषि उत्पाद, मसाले, और कपड़े जैसे उत्पादों पर आधारित था।
यूरोपीय देशों ने एशियाई और अफ्रीकी देशों से व्यापार किया, जिसमें हाथ से बनी वस्तुओं का
आदान-प्रदान होता था।
प्रश्न 4:
कारखानों
के उदय से श्रमिकों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
कारखानों के उदय से
श्रमिकों का जीवन काफी कठिन हो गया। मजदूरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता था,
और काम करने की
स्थितियाँ बहुत खराब थीं। हालांकि, इससे
रोजगार के अवसर बढ़े, लेकिन
काम करने की स्थिति और वेतन बहुत कम था।
प्रश्न 5:
औद्योगीकरण
ने वैश्विक व्यापार पर क्या प्रभाव डाला?
उत्तर:
औद्योगीकरण ने
वैश्विक व्यापार में बड़ा बदलाव लाया। उत्पादन प्रक्रिया में मशीनों के इस्तेमाल
से बड़ी मात्रा में वस्त्र और अन्य उत्पादों का उत्पादन संभव हुआ, जिससे इनका निर्यात बड़े पैमाने पर हुआ।
इसके साथ ही कच्चे माल की मांग भी बढ़ी, जिससे उपनिवेशों का शोषण हुआ।
प्रश्न 6:
उपनिवेशों
में औद्योगीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
उपनिवेशों में
औद्योगीकरण के कारण वहां के संसाधनों का बड़े पैमाने पर शोषण हुआ। यूरोपीय
शक्तियों ने कच्चे माल का दोहन किया और श्रमिकों का शोषण किया। उपनिवेशों से
आयातित कच्चे माल से यूरोप में औद्योगिक उत्पादन बढ़ा और उपनिवेशों को उनके श्रम
और संसाधनों का पर्याप्त लाभ नहीं मिला।
प्रश्न 7:
पर्यावरण
पर औद्योगीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
औद्योगीकरण का
पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। कारखानों से निकलने वाला धुआं और कचरा प्रदूषण
का कारण बना। प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया गया, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हुआ
और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ बढ़ीं।
प्रश्न 8:
भारत
में औद्योगिक विकास का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
भारत में औद्योगिक
विकास के कारण पारंपरिक कुटीर उद्योगों का पतन हुआ। ब्रिटिश उपनिवेशवादी नीति के
तहत भारतीय उद्योगों को दबा दिया गया और भारतीय कारीगरों और श्रमिकों को कारखानों
में कम मजदूरी पर काम करना पड़ा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई और
औद्योगिक उत्पादन पर ब्रिटिश नियंत्रण हो गया।
अभ्यास प्रश्न
- मृणालिनी सिंह द्वारा अपने लेख में
प्रदर्शित किए गए ‘अर्थशास्त्र‘ के मुख्य सिद्धांतों की चर्चा करें।
उत्तर: मृणालिनी सिंह ने अपने लेख में
आर्थिक विकास और औद्योगिकरण के संबंध पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि
कैसे वैश्विक व्यापार और उत्पादन प्रक्रिया के मशीनीकरण ने आर्थिक वृद्धि को
बढ़ावा दिया और सामाजिक असमानताओं को भी जन्म दिया।
- भारत में औद्योगिक विकास की प्रक्रिया किस
प्रकार से प्रारंभ हुई और इसके प्रमुख प्रभाव क्या थे?
उत्तर: भारत में औद्योगिक विकास मुख्य
रूप से ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान प्रारंभ हुआ। इस प्रक्रिया ने पारंपरिक
कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया और पश्चिमी देशों के लिए कच्चे माल का स्रोत
बन गया। इससे आर्थिक असमानता और श्रमिकों की कठिनाइयों में वृद्धि हुई।
- निम्नलिखित घटनाओं पर अपने विचार व्यक्त
करें:
(क) भारत में वस्त्र उद्योग का पतन
(ख) ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारतीय
श्रमिकों का शोषण
(ग) कारखानों की स्थापना का श्रमिक वर्ग पर
प्रभाव
उत्तर:
- (क) भारत में वस्त्र उद्योग का पतन मुख्य
रूप से ब्रिटिश शासन के कारण हुआ, जब
ब्रिटिशों ने भारतीय वस्त्रों की बजाय ब्रिटेन के वस्त्रों को बढ़ावा दिया। - (ख) ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय श्रमिकों
का शोषण हुआ, उन्हें कम वेतन और कठोर
परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। - (ग) कारखानों की स्थापना ने श्रमिक वर्ग पर
भारी दबाव डाला, उन्हें लंबे समय तक काम करना
पड़ता था और काम की स्थितियाँ बहुत खराब थीं।
- ‘औद्योगीकरण से पहले की दुनिया‘ और ‘औद्योगीकरण के बाद की दुनिया‘ के बीच तुलना करें।
उत्तर: औद्योगीकरण से पहले दुनिया मुख्य
रूप से कृषि और हस्तशिल्प पर आधारित थी। उत्पादन छोटे पैमाने पर होता था और
घरेलू उद्योगों का बोलबाला था। जबकि औद्योगीकरण के बाद मशीनीकरण के कारण बड़े
पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ, कारखानों
की स्थापना हुई, और वैश्विक व्यापार में वृद्धि
हुई।
- किसी भी एक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक घटना का
उल्लेख करें जिसने भारत के औद्योगिक विकास को प्रभावित किया हो।
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO)
के नियमों ने भारत के औद्योगिक विकास को
प्रभावित किया। इन नियमों के तहत भारत को अपने बाजारों को अन्य देशों के लिए
खोलना पड़ा, जिससे भारतीय उद्योगों को
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
1. निम्नलिखित की व्याख्या करें:
(द) ब्रिटेन की महिला मजदूरों ने स्पिनिंग
जेनी मशीनों पर विरोध किया।
ब्रिटेन की महिला
मजदूरों ने स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनों के इस्तेमाल का विरोध किया क्योंकि इससे
उनके रोजगार छिनने का खतरा था। यह मशीन कपड़े को तेजी से बुनने का काम करती थी, जिससे मानव श्रम की आवश्यकता कम हो गई
थी।
(ख) सत्रहवीं सदी में यूरोपीय शहरों के
संगठित गांवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाना शुरू हुआ।
सत्रहवीं सदी में
यूरोपीय शहरों में बड़े पैमाने पर संगठित गांव बनाए गए, जहां किसानों और कारीगरों को कम वेतन पर
काम करने के लिए संगठित किया गया। इन गाँवों में उत्पादों को बनाने के लिए लोगों
से श्रम लिया जाता था, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो
सका।
(ग) सूरत बंदरगाह अठारहवीं सदी के अंत तक
व्यापार के मुख्य केंद्र के रूप में काम कर रहा था।
सूरत का बंदरगाह
अठारहवीं सदी के अंत तक एक प्रमुख व्यापार केंद्र था, लेकिन बाद में इसके महत्व में कमी आई।
अंग्रेजों के आने और कोलकाता व बॉम्बे जैसे बंदरगाहों के विकास से सूरत की भूमिका
सीमित हो गई।
(घ) ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में
बुनकरों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए एजेंट नियुक्त किए।
ईस्ट इंडिया कंपनी
ने भारतीय बुनकरों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए एजेंटों को नियुक्त किया। इन
एजेंटों का काम बुनकरों से सस्ते दाम पर माल खरीदना और उन्हें नियंत्रित रखना था
ताकि ब्रिटिश बाजार में उत्पादों की आपूर्ति बनी रहे।
2. प्रत्येक वाक्य के आगे “सही”
या “गलत” लिखें:
(द) अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में यूरोप
का 80 प्रतिशत श्रमिक वर्ग औद्योगिक क्षेत्रों
में काम कर रहा था।
गलत – उस समय
यूरोप में ज्यादातर लोग कृषि कार्य में लगे हुए थे और औद्योगिक क्षेत्रों में काम
करने वाले श्रमिकों की संख्या कम थी।
(ख) अठारहवीं सदी तक, भारत अंतर्राष्ट्रीय कपड़ा व्यापार में
अग्रणी था।
सही – अठारहवीं
सदी तक भारत कपड़ा उत्पादन और निर्यात में विश्व स्तर पर अग्रणी था।
(ग) अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के बाद
भारत के कपड़ा उद्योग में गिरावट आई।
सही – अमेरिकी
स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय कपड़ा उद्योग पर कर और प्रतिबंध
लगाना शुरू किया, जिससे भारतीय उद्योग को नुकसान हुआ।
(घ) फ्लाइंग शटल के आगमन से हथकरघा
मजदूरों की उत्पादकता में सुधार हुआ।
सही – फ्लाइंग शटल
के आविष्कार से हथकरघा मजदूरों की उत्पादकता में तेजी से सुधार हुआ और काम जल्दी
पूरा होने लगा।
3. पूर्व-औद्योगीकरण का अर्थ समझाइए।
पूर्व-औद्योगीकरण
उस समय को संदर्भित करता है जब औद्योगिक क्रांति से पहले उत्पादन मुख्य रूप से
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर होता था। इसमें लोग घरों पर ही कपड़ा बुनने और
अन्य हस्तशिल्प कार्य करते थे। उत्पादन प्रक्रियाओं में मशीनों का उपयोग नहीं किया
जाता था, और श्रम मुख्य रूप से मानव और पशु शक्ति
पर निर्भर था।
1. अठारहवीं सदी के यूरोप में कुछ मशीनीकरण
के कारण हाथ से काम करने वाले मजदूरों को प्राथमिकता क्यों दी जाती थी?
उत्तर: अठारहवीं
सदी के यूरोप में मशीनीकरण के बावजूद कुछ उद्योगों में हाथ से काम करने वाले
मजदूरों को प्राथमिकता इसलिए दी जाती थी क्योंकि कुछ वस्त्र और अन्य वस्तुओं की
गुणवत्ता को मशीनों से बनाए जाने पर उतनी कुशलता से नहीं बनाया जा सकता था। हाथ से
काम करने वाले श्रमिकों की कला और कुशलता का महत्व बना हुआ था, और उनकी बनाई चीज़ों की मांग अधिक थी।
इसके अलावा, मशीनों के इस्तेमाल में श्रमिकों के लिए
नई तकनीक को सीखना भी चुनौतीपूर्ण था, जिससे हाथ से काम करना जारी रहा।
2. ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों से
सस्ते और श्रेष्ठ कपड़ों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या किया?
उत्तर: ईस्ट
इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों से सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों की निरंतर
आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बुनकरों पर सख्त नियंत्रण रखा। कंपनी ने एजेंटों को
नियुक्त किया जो बुनकरों से सीधे कपड़े खरीदते थे और उन्हें नियंत्रित रखते थे।
बुनकरों को बंधुआ मजदूरी की स्थिति में काम करना पड़ता था और उन्हें उचित भुगतान
नहीं किया जाता था। कंपनी ने इस प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए अनुबंधों के
माध्यम से बुनकरों को अपने अधीन कर लिया।
3. कल्पना करें कि आपको ब्रिटेन और कपास
उद्योग के इतिहास के बारे में विश्वकोश (Encyclopaedia) के लिए एक लेख लिखने के लिए कहा गया है।
इस प्रक्रिया में दी गई जानकारी के आधार पर अपना लेख लिखें।
उत्तर: ब्रिटेन
में कपास उद्योग का इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह औद्योगिक क्रांति के
दौरान ब्रिटेन के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बना। अठारहवीं सदी के अंत में
ब्रिटेन में कपास उद्योग में बड़े बदलाव हुए। मशीनीकरण के आगमन के साथ, स्पिनिंग जेनी और पावर लूम जैसी मशीनों
ने कपास के उत्पादन को तेज कर दिया। ब्रिटेन ने भारत और अन्य उपनिवेशों से कच्चा
कपास आयात किया और इसे अपने कारखानों में तैयार कपड़े के रूप में बदलकर निर्यात
किया। ब्रिटेन का कपास उद्योग न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक था, बल्कि इसके साथ ही उसने उपनिवेशों के
संसाधनों और श्रम का बड़े पैमाने पर शोषण किया।
4. पहले विश्व युद्ध के समय भारत में
औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा?
उत्तर: पहले विश्व
युद्ध के समय भारत में औद्योगिक उत्पादन इसलिए बढ़ा क्योंकि युद्ध के दौरान
ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के कारखाने सैन्य आपूर्ति पर केंद्रित थे और नागरिक
वस्त्रों और उत्पादों का उत्पादन कम हो गया था। इससे भारत में स्थानीय उद्योगों को
बढ़ावा मिला, क्योंकि भारतीय उद्योगों को अपने उत्पादन
को बढ़ाने और घरेलू मांग को पूरा करने का अवसर मिला। इसके अलावा, युद्ध के कारण ब्रिटेन से होने वाले आयात
में भी कमी आई, जिससे भारतीय बाजारों में स्थानीय
उत्पादों की मांग बढ़ी।
Project Work
प्रश्न:
अपने क्षेत्र में किसी एक
उद्योग को चुनकर उसके इतिहास का पता लगाएँ। उसकी प्रौद्योगिकी किस प्रकार बदली?
उसमें मजदूर कहाँ से आते
हैं? उसके उत्पादों का प्रचार
और मार्केटिंग किस प्रकार की जाती है? उस उद्योग के इतिहास के बारे में उसके मालिकों और उसमें काम करने वाले कुछ
मजदूरों से बात करके जानें।
कल्पना आधारित
उत्तर:
मैंने अपने
क्षेत्र में कपड़ा उद्योग को चुना, जो लंबे समय से
अस्तित्व में है और इसका इतिहास बहुत पुराना है। यह उद्योग प्राचीन काल से ही चल
रहा है, विशेषकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में।
समय के साथ इस उद्योग में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
1. इस उद्योग की शुरुआत का इतिहास:
कपड़ा उद्योग की
शुरुआत पारंपरिक हस्तशिल्प और घरों में हाथ से बनाए गए कपड़ों से हुई थी। पहले लोग
हाथों से कपड़े बुनते थे, लेकिन समय के साथ, इस उद्योग में मशीनीकरण हुआ, विशेषकर औद्योगिक क्रांति के बाद, जिससे उत्पादन की गति और गुणवत्ता में
वृद्धि हुई।
2. प्रौद्योगिकी में बदलाव:
प्रारंभ में, कपड़े हाथ से बुने जाते थे, लेकिन औद्योगिक क्रांति के दौरान
स्पिनिंग जेनी, पावर लूम और फ्लाइंग शटल जैसी मशीनों के
आने से इस उद्योग में मशीनीकरण हो गया। इन नई तकनीकों ने कपड़े की उत्पादन क्षमता
को बढ़ाया और श्रम की लागत को कम किया। इसके बाद से उद्योग में लगातार तकनीकी
सुधार होते रहे हैं, और आज के समय में आधुनिक मशीनें, जैसे ऑटोमेटेड लूम और कंप्यूटराइज्ड
डिजाइनिंग मशीनों का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पादों की विविधता और गुणवत्ता में और अधिक सुधार
हुआ है।
3. श्रमिक कहां से आते हैं:
इस उद्योग में काम
करने वाले मजदूर मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से आते हैं। प्रारंभ
में, यह एक पारिवारिक व्यवसाय होता था, जिसमें पूरे परिवार के सदस्य कपड़ा
उत्पादन में शामिल होते थे। लेकिन मशीनीकरण और शहरीकरण के बाद, यह एक पेशेवर उद्योग बन गया, जिसमें कुशल और अकुशल श्रमिक दोनों शामिल
होते हैं। आज, कई श्रमिक कपड़ा मिलों और फैक्ट्रियों
में काम करने के लिए दूसरे राज्यों से भी आते हैं।
4. उत्पादों का प्रचार और मार्केटिंग:
कपड़ा उद्योग के
उत्पादों का प्रचार आधुनिक समय में विभिन्न माध्यमों से किया जाता है, जैसे कि फैशन शो, डिजिटल मार्केटिंग, और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए।
पहले स्थानीय बाजारों और मेले में ही कपड़े बेचे जाते थे, लेकिन अब ऑनलाइन मार्केटिंग और
अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर कपड़ों का
प्रचार-प्रसार होता है। इसके अलावा, बड़े-बड़े ब्रांड्स और कंपनियां अपने कपड़ों की गुणवत्ता और
डिजाइनों को वैश्विक स्तर पर पेश करती हैं, जिससे उनकी बिक्री में भी इजाफा होता है।
5. उद्योग का मालिकाना हक और श्रमिकों का
अनुभव:
कपड़ा उद्योग में
कई बड़े उद्योगपति और कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने समय के साथ अपने कारोबार को बढ़ाया है। उदाहरण के
लिए, टाटा, रिलायंस, और आदित्य बिड़ला
ग्रुप जैसी कंपनियां कपड़ा उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इस उद्योग में
काम करने वाले श्रमिकों से बात करने पर पता चला कि उन्हें काम में कुशलता हासिल
करने के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि, कई बार उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम
करना पड़ता है, लेकिन उद्योग की बढ़ती तकनीकी उन्नति ने
उनके काम को आसान भी बनाया है।
निष्कर्ष:
कपड़ा उद्योग ने
समय के साथ खुद को बदला है और नई तकनीकों को अपनाया है। इसमें काम करने वाले
श्रमिक भी अब कुशल हो गए हैं और आधुनिक मशीनों के साथ काम कर रहे हैं। यह उद्योग
आज भी भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इसके उत्पाद देश-विदेश में लोकप्रिय
हैं।