Explore the rise of Indian nationalism, key movements, and
Mahatma Gandhi’s leadership in India’s freedom struggle.
Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद Nationalism
in India
Class 10 NCERT History Solutions in Hindi: भारत और समकालीन
विश्व -2
Updated for 2024-2025 Exams
Concept Map: भारतीय राष्ट्रवाद का उदय (The Rise of Indian Nationalism)
1. Colonial
Rule and Economic Impact / औपनिवेशिक शासन और आर्थिक प्रभाव
- Economic Drain / आर्थिक शोषण:
भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान आर्थिक
शोषण और संसाधनों की लूट। - Agrarian Crisis / कृषि संकट:
ब्रिटिश शासन में किसानों की स्थिति खराब
होती गई, जिससे
ग्रामीण भारत में आक्रोश बढ़ा।
2. Impact
of World War I / प्रथम
विश्व युद्ध का प्रभाव
- Heavy Taxation and Forced Recruitment / भारी कराधान और जबरन भर्ती:
विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने
भारतीयों पर भारी कर लगाए और युद्ध के लिए जबरन भर्ती की। - Economic Hardship / आर्थिक कठिनाई:
युद्ध के बाद, देश में आर्थिक संकट बढ़ा, जिससे खाद्य संकट और बेरोजगारी उत्पन्न
हुई।
3. Rise
of Mahatma Gandhi and Non-Cooperation / महात्मा गांधी का उदय और असहयोग आंदोलन
- Philosophy of Non-Violence / अहिंसा की विचारधारा:
महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह को
अपने आंदोलनों का आधार बनाया। - Champaran and Kheda Movements / चंपारण और खेड़ा आंदोलन:
गांधी ने चंपारण और खेड़ा में किसानों के
संघर्षों का नेतृत्व किया, जिससे
उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली।
4. Emergence
of New Social Groups / नए सामाजिक समूहों का उदय
- Role of Women and Workers / महिलाओं और श्रमिकों की भूमिका:
असहयोग आंदोलन में महिलाओं और मजदूरों ने
सक्रिय भाग लिया। - Participation of Students and Lawyers / छात्रों और वकीलों की भागीदारी:
आंदोलन में विभिन्न सामाजिक वर्गों ने
हिस्सा लिया, जिसमें
छात्रों और वकीलों का बड़ा योगदान रहा।
5. Cultural
and Ideological Influence / सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभाव
- Revival of Indigenous Traditions / स्वदेशी परंपराओं का पुनरुत्थान:
भारतीय संस्कृति और परंपराओं का
पुनर्जागरण हुआ, जो
राष्ट्रवाद के लिए प्रेरणास्त्रोत बना। - Role of Press and Literature / प्रेस और साहित्य की भूमिका:
अखबारों और साहित्य ने राष्ट्रवाद के
विचारों को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6. Civil
Disobedience Movement / सविनय अवज्ञा आंदोलन
- Salt March / दांडी मार्च:
1930 में महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह शुरू
किया, जो
ब्रिटिश कानून के खिलाफ एक प्रमुख आंदोलन बना। - Mass Protests / जनआंदोलन:
इस आंदोलन में लाखों भारतीयों ने भाग
लिया और ब्रिटिश सामानों का बहिष्कार किया।
प्रश्न 1: भारतीय
अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश शासन का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय
अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। आर्थिक शोषण के माध्यम से भारत के संसाधनों का
निर्यात किया गया, जिससे
आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। भारतीय उद्योगों का विनाश किया गया और कृषि संकट के
कारण किसानों की स्थिति बदतर हो गई। भारी कर और ऋण ने किसानों की जिंदगी और कठिन
बना दी।
प्रश्न 2: प्रथम
विश्व युद्ध के भारतीय राष्ट्रवाद पर क्या प्रभाव थे?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध का भारतीय राष्ट्रवाद
पर गहरा प्रभाव पड़ा। ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के दौरान भारतीयों पर भारी कर लगाए
और जबरन सैनिक भर्ती की, जिससे
भारतीय समाज में गुस्सा और आक्रोश पैदा हुआ। युद्ध के बाद आर्थिक कठिनाइयों ने इस
असंतोष को और बढ़ा दिया। इन सबके चलते भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने गति पकड़ी और
भारतीय नेताओं ने अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक संघर्ष का नेतृत्व किया।
प्रश्न 3: महात्मा
गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में किस प्रकार का योगदान दिया?
उत्तर: महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता
संग्राम में अहिंसा और सत्याग्रह की रणनीति अपनाई। उन्होंने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद आंदोलनों के माध्यम
से किसानों और श्रमिकों के संघर्ष का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में असहयोग आंदोलन
और सविनय अवज्ञा आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया। दांडी मार्च
(नमक सत्याग्रह) उनके नेतृत्व में एक प्रमुख घटना थी, जिसने ब्रिटिश कानून के खिलाफ बड़े
पैमाने पर जन आंदोलन का रूप लिया।
प्रश्न 4: भारतीय
स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं और श्रमिकों की भूमिका क्या थी?
उत्तर: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं
और श्रमिकों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। महिलाएं न केवल रैलियों और आंदोलनों में भाग
लेती थीं, बल्कि
उन्होंने संगठनों का नेतृत्व भी किया। श्रमिक वर्ग ने भी असहयोग और सविनय अवज्ञा
आंदोलनों में भाग लिया और ब्रिटिश उत्पादों का बहिष्कार किया। इन वर्गों के सक्रिय
समर्थन ने राष्ट्रीय आंदोलन को अधिक व्यापक और जनसामान्य का आंदोलन बनाया।
प्रश्न 5: सविनय
अवज्ञा आंदोलन क्या था और इसका क्या महत्व था?
उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन महात्मा गांधी
द्वारा 1930 में
शुरू किया गया एक प्रमुख जन आंदोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश कानूनों का
उल्लंघन कर उनके खिलाफ जन असहमति जताना था। दांडी मार्च इस आंदोलन का मुख्य हिस्सा
था, जिसमें गांधीजी और
उनके अनुयायियों ने नमक कानून का उल्लंघन किया। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के खिलाफ
बड़े पैमाने पर नागरिक अवज्ञा का प्रतीक बन गया और इसमें लाखों भारतीयों ने भाग
लिया।
प्रश्न 6: भारतीय
स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेस और साहित्य की क्या भूमिका थी?
उत्तर: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेस और
साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका थी। अखबारों, पत्रिकाओं, और साहित्यिक कृतियों के माध्यम से
राष्ट्रवाद के विचारों का प्रसार किया गया। इसने लोगों में जागरूकता फैलाई और
ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनमत तैयार किया। कई लेखकों और कवियों ने भारतीय स्वतंत्रता
संग्राम के समर्थन में रचनाएँ लिखीं, जो जनता को प्रेरित करती रहीं।
1. Explain:
(d) औपनिवेशिक आंदोलनों में राष्ट्रवाद के
उदय की प्रक्रिया स्वतंत्रता विरोधी आंदोलनों से क्यों जुड़ी थी?
- राष्ट्रवाद
का उदय औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध से जुड़ा हुआ था। यह लोगों की स्वतंत्रता
और अपनी पहचान की मांग के रूप में विकसित हुआ। औपनिवेशिक शक्तियों के खिलाफ
संघर्ष ने राष्ट्रवाद के विचार को मजबूत किया, क्योंकि लोग विदेशी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करना
चाहते थे।
([k) पहले विश्व युद्ध ने भारत में
राष्ट्रवादी आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?
- पहले विश्व
युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारत से आर्थिक संसाधनों और सैनिकों की भारी
मांग की। इस दौरान भारतीयों में ब्रिटिश सरकार के प्रति असंतोष बढ़ा और
उन्हें स्वशासन की आवश्यकता महसूस हुई। इस असंतोष ने राष्ट्रीय आंदोलन को और
तेज कर दिया।
(x) भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में
क्यों थे?
- रॉलेट एक्ट
ने ब्रिटिश सरकार को बिना मुकदमे के किसी भी भारतीय को गिरफ्तार करने का
अधिकार दिया था। यह कानून भारतीयों की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के खिलाफ
था, जिससे लोगों
में आक्रोश फैला और इसके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
(?k) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने
का निर्णय क्यों लिया?
- चौरी चौरा की
हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने महसूस किया कि आंदोलन के दौरान लोग अहिंसा के
सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने हिंसा का विरोध करते हुए आंदोलन
को वापस लेने का निर्णय लिया ताकि आंदोलन अहिंसात्मक बना रहे।
2. सत्याग्रह के विचार का क्या अर्थ है?
- सत्याग्रह के
विचार का अर्थ है कि सत्य और न्याय की शक्ति सबसे बड़ी होती है। यदि आपका
उद्देश्य सत्य पर आधारित है और आप न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो बिना हिंसा के भी आप सफल हो सकते
हैं। गांधीजी ने सत्याग्रह के माध्यम से अहिंसा का पालन करते हुए ब्रिटिश
शासन का विरोध किया।
3. रिपोर्ट लिखें:
(d) जलियाँवाला बाग नरसंहार
- जलियाँवाला
बाग में जनरल डायर के नेतृत्व में निहत्थे भारतीयों पर गोलीबारी की गई थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। यह
घटना भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और इसने
ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय जनता के गुस्से को भड़काया।
([k) साइमन कमीशन
- साइमन कमीशन 1927 में भारत भेजा गया था, जिसका उद्देश्य भारत में संवैधानिक
सुधारों पर विचार करना था। लेकिन इस कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए भारतीयों ने इसका विरोध किया।
“साइमन गो बैक” का नारा दिया गया और देश भर में विरोध प्रदर्शन
हुए।
4. इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और
अध्याय 1 में दी गई जर्मनिया की छवि की तुलना
करें।
- भारत माता की
छवि और जर्मनिया की छवि दोनों राष्ट्रवादी प्रतीक हैं, जो अपने-अपने राष्ट्रों की
स्वतंत्रता और गौरव का प्रतिनिधित्व करती हैं। दोनों छवियों में महिला रूप
में राष्ट्र की कल्पना की गई है, लेकिन भारत माता भारतीय संस्कृति और भारतीय स्वतंत्रता
की देवी के रूप में उभरती हैं, जबकि जर्मनिया जर्मनी के राष्ट्रीय एकीकरण और संघर्ष
की प्रतीक हैं।
प्रश्न 1: 1921 के असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक वर्गों
की सूची बनाएं। इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन का चयन करें और उनके उद्देश्यों एवं
संगठनों के बारे में लिखें कि वे आंदोलन में क्यों शामिल हुए।
उत्तर:
1921 के असहयोग आंदोलन
में विभिन्न सामाजिक वर्ग शामिल थे, जैसे:
- किसान
- व्यापारी
- मजदूर
- विद्यार्थी
- महिलाएं
किसान: किसानों ने इस आंदोलन में भाग लिया
क्योंकि वे ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए अत्यधिक करों और दमनकारी नीतियों के
खिलाफ थे।
व्यापारी: व्यापारी वर्ग विदेशी वस्त्रों और
सामानों का बहिष्कार करके आंदोलन का समर्थन कर रहा था, क्योंकि वे चाहते थे कि स्वदेशी
उद्योगों को बढ़ावा मिले।
महिलाएं: महिलाओं ने इस आंदोलन में सक्रिय
भागीदारी दिखाई, वे भारतीय
स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान देना चाहती थीं और सामाजिक सुधारों के लिए
प्रेरित थीं।
प्रश्न 2: स्वराज का विचार किस प्रकार असहयोग आंदोलन का एक
प्रेरणादायक सिद्धांत था?
उत्तर:
स्वराज (स्वशासन)
का विचार असहयोग आंदोलन का एक प्रेरणादायक सिद्धांत था क्योंकि इससे भारतीयों में
स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की भावना जाग्रत हुई। महात्मा गांधी ने यह विचार
प्रस्तुत किया कि भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपना
आत्मनिर्भर शासन स्थापित करना होगा। इस विचार ने लोगों को संगठित किया और आंदोलन
को एक व्यापक रूप दिया।
प्रश्न 3: कल्पना करें कि आप सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने वाली
एक महिला हैं। इस अनुभव का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
सविनय अवज्ञा
आंदोलन में भाग लेने वाली महिला होने के नाते, मैंने पहली बार राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष में भाग लिया।
इस आंदोलन ने मुझे यह सिखाया कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना कितना महत्वपूर्ण है।
मेरे जीवन पर इसका प्रभाव यह पड़ा कि मैंने आत्मनिर्भरता, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों को
अपनाया, और मैंने अपने समुदाय में भी इन आदर्शों
को फैलाने का प्रयास किया।
प्रश्न 4: जमींदार और किसान के बीच असहमति के मुद्दे क्या थे, और ये असहमति असहयोग आंदोलन के दौरान
क्यों उत्पन्न हुईं?
उत्तर:
जमींदार और किसान
के बीच मुख्य असहमति जमीन के मालिकाना हक और करों के मुद्दे पर थी। किसान उच्च
करों और जमींदारों के अत्याचारों से परेशान थे। असहयोग आंदोलन के दौरान, किसानों ने जमींदारों का बहिष्कार किया
और कर देने से इनकार किया, जिससे यह असहमति और गहरा गई।
प्रश्न 5: भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और इंडोनेशिया के स्वतंत्रता
आंदोलन की तुलना करें।
उत्तर:
भारत और इंडोनेशिया
के स्वतंत्रता आंदोलनों में समानता यह थी कि दोनों आंदोलनों में जनता ने
उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष किया। हालांकि, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में
अहिंसा और सत्याग्रह पर आधारित था, जबकि इंडोनेशिया में संघर्ष हिंसक था और युद्ध के माध्यम से
स्वतंत्रता प्राप्त की गई।