यूरोप में
राष्ट्रवाद का उदय in Hindi – rise of
nationalism in Europe, focusing on key figures like Mazzini, Cavour, and the unification of Italy and Germany
Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का
उदय Rise of Nationalism in Europe
Class 10 NCERT History Solutions in Hindi: भारत और समकालीन
विश्व -2
Updated for 2024-2025 Exams
Concept
Map: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय / Rise of Nationalism in Europe
1. राष्ट्रवाद का प्रारंभ / The
Beginning of Nationalism
- फ्रांसीसी क्रांति (1789) / French Revolution (1789):
- फ्रांस में राष्ट्रीय पहचान का निर्माण
/ Creation of national identity in France - क्रांतिकारी विचारों का यूरोप में
प्रसार / Spread of revolutionary ideas across Europe - राष्ट्रवाद के प्रतीक: La Patrie
(पितृभूमि) और Le Citoyen (नागरिक)
/ Symbols of nationalism: La Patrie
(Fatherland) and Le Citoyen
(Citizen)
2. मुख्य विचार और आंदोलन / Key
Ideas and Movements
- उदारवाद और राष्ट्रवाद / Liberalism and Nationalism:
- स्वतंत्रता और समानता के लिए राजनीतिक
और सामाजिक आंदोलन / Political and social movements for freedom
and equality - लोकतांत्रिक आदर्शों का विकास और
राजतंत्र का पतन / Rise of democratic ideals and the fall of
monarchies - इटली और जर्मनी का एकीकरण / Unification of Italy and Germany:
- कैवूर, गैरीबाल्डी, और बिस्मार्क की भूमिका / Role
of leaders like Cavour, Garibaldi, and Bismarck - एकीकरण की प्रक्रिया और चुनौतियाँ / Process
of unification and challenges faced
3. फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव / Impact
of the French Revolution
- क्रांतिकारी विचारों का प्रसार / Spread
of revolutionary ideas - नेपोलियन कोड और यूरोप पर इसका प्रभाव / Napoleonic
Code and its influence across Europe - नागरिक स्वतंत्रता और कानूनी समानता का
विकास / Development of civil liberties and legal equality
4. 1830
और
1848 की क्रांतियाँ / The
Revolutions of 1830 and 1848
- क्रांतियों के कारण और प्रभाव / Causes
and impacts of the revolutions - राजतंत्र के खिलाफ जन विद्रोह / Popular
uprisings against monarchies - संवैधानिक राजतंत्र और गणराज्य की
स्थापना / Establishment of constitutional monarchies and republics
5. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद / Cultural
Nationalism
- भाषा, साहित्य और लोक परंपराओं की भूमिका / Role
of language, literature, and folk traditions - राष्ट्रीय चेतना के विकास में संस्कृति
का योगदान / Contribution of culture in developing national
consciousness - उदाहरण: हर्डर का “फोक्सगिस्ट”
विचार / Example: Herder’s concept of “Volksgeist”
(Spirit of the People)
6. नेपोलियन के बाद का यूरोप / Post-Napoleonic
Europe
- वियना कांग्रेस (1815) / Congress of Vienna (1815):
- राजतंत्रों की पुनर्स्थापना और
रूढ़िवादी व्यवस्था / Restoration of monarchies and conservative
order - यूरोप की सीमाओं का पुनर्निर्धारण / Redrawing
of European borders - उदारवादी और राष्ट्रवादी आंदोलनों का
विकास / Growth of
Liberal and Nationalist Movements: - आत्मनिर्णय और प्रतिनिधि सरकारों के
विचारों का प्रसार / Spread of ideas advocating for
self-determination and representative governments
प्रश्न 1: यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय का प्रारंभ
कब और कैसे हुआ?
उत्तर: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रारंभ हुआ। इस
क्रांति के दौरान, फ्रांसीसी जनता ने राजा की सत्ता को
चुनौती दी और एक राष्ट्रीय सरकार की स्थापना की। फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रीय
पहचान की भावना को बढ़ावा दिया, जिसमें “ला
पेत्रि” (पितृभूमि) और “ले सिटोयेन” (नागरिक) जैसे प्रतीकों का
विकास हुआ। इसके बाद, क्रांतिकारी विचारों का प्रसार यूरोप के
अन्य हिस्सों में भी हुआ, जिससे राष्ट्रवाद के विचार को बल मिला।
प्रश्न 2: फ्रांसीसी क्रांति के क्या प्रमुख प्रभाव थे?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति के कई प्रमुख प्रभाव
थे:
- नेपोलियन कोड: यह एक कानूनी ढांचा था जिसने नागरिक
स्वतंत्रता और कानूनी समानता की स्थापना की। - क्रांतिकारी
विचारों का प्रसार: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे आदर्श पूरे यूरोप में फैल गए। - राष्ट्रीय
पहचान का विकास: नागरिकता और
राष्ट्रीयता के आधार पर लोगों ने अपनी पहचान बनानी शुरू की।
प्रश्न 3: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का क्या महत्व था?
उत्तर: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महत्व यह था कि
इसने भाषा, साहित्य, लोककथाओं और परंपराओं को राष्ट्रवादी चेतना के विकास के लिए
एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। जोहान गॉटफ्राइड हर्डर ने
“फोक्सगिस्ट” (जनता की आत्मा) का विचार प्रस्तुत किया, जिसमें संस्कृति को एक राष्ट्र की आत्मा
के रूप में देखा गया। इस विचार ने राष्ट्रीय एकता और पहचान को मजबूत किया।
प्रश्न 4: इटली और जर्मनी के एकीकरण में कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?
उत्तर: इटली और जर्मनी के एकीकरण में प्रमुख
नेताओं की भूमिका थी:
- इटली: कैवूर, गैरीबाल्डी और माजिनी ने इटली के
एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न राज्यों को एकजुट करने
और एक स्वतंत्र इटली बनाने के लिए संघर्ष किया। - जर्मनी: बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण में
मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने युद्ध और कूटनीति के माध्यम से विभिन्न जर्मन
राज्यों को एकजुट किया और जर्मन साम्राज्य की स्थापना की।
प्रश्न 5: 1830 और 1848 की क्रांतियों के क्या कारण थे और इनका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 1830 और 1848 की क्रांतियों के प्रमुख कारण थे:
- आर्थिक और सामाजिक
असमानता: किसानों और
श्रमिक वर्गों को अत्यधिक गरीबी और असमानता का सामना करना पड़ रहा था। - राजनीतिक
अधिकारों की मांग: लोग अधिक
राजनीतिक अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे।
प्रभाव:
- 1830 की क्रांति के बाद फ्रांस में
चार्ल्स X को हटाकर लुई
फिलिप को सत्ता में लाया गया। - 1848 की क्रांति ने पूरे यूरोप में
राजतंत्रों को चुनौती दी और कई जगहों पर संवैधानिक सुधार और लोकतांत्रिक
सरकारों की स्थापना की।
प्रश्न 6: वियना कांग्रेस (1815) का क्या महत्व था?
उत्तर: वियना कांग्रेस 1815 में नेपोलियन की हार के बाद आयोजित की गई
थी। इसका मुख्य उद्देश्य यूरोप में राजतंत्रों को पुनः स्थापित करना और
क्रांतिकारी विचारों को दबाना था। इस कांग्रेस में यूरोप की सीमाओं को
पुनर्निर्धारित किया गया और एक स्थिर राजनैतिक व्यवस्था स्थापित की गई, जिसका उद्देश्य शक्ति संतुलन बनाए रखना
था।
प्रश्न 7: उदारवाद (लिबरलिज्म) और राष्ट्रवाद के बीच क्या संबंध था?
उत्तर: उदारवाद और राष्ट्रवाद एक-दूसरे से जुड़े
हुए थे। उदारवाद का मुख्य सिद्धांत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता था, जबकि राष्ट्रवाद एक राष्ट्र के रूप में
संगठित समाज की अवधारणा को बढ़ावा देता था। उदारवाद ने राजनीतिक अधिकारों, संवैधानिक सरकार और नागरिक स्वतंत्रता के
लिए लड़ाई की, जो राष्ट्रवादी आंदोलनों को समर्थन देता
था। राष्ट्रवाद ने लोगों को एक सामान्य राष्ट्रीय पहचान के तहत एकजुट किया।
प्रश्न 8: नेपोलियन कोड क्या था और इसका क्या प्रभाव था?
उत्तर: नेपोलियन कोड एक नागरिक कानूनी संहिता थी
जिसे नेपोलियन ने 1804 में लागू किया। इसका उद्देश्य पूरे यूरोप
में कानूनी एकरूपता स्थापित करना था। इस कोड ने नागरिक स्वतंत्रता, संपत्ति के अधिकार, और कानूनी समानता की स्थापना की। यह
कानून यूरोप के कई हिस्सों में लागू किया गया और इससे आधुनिक यूरोपीय कानून
प्रणाली के विकास में योगदान मिला।
1. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें:
(d) त्सॉल्जीपी (Giuseppe
Mazzini)
- यह इटली का
एक क्रांतिकारी नेता था, जिसने इटली के विभिन्न राज्यों को एकजुट करने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
त्सॉल्जीपी एस्फ़्रीनी का
महत्व:
1. यंग इटली आंदोलन: माज़िनी ने 1831 में ‘यंग इटली‘ संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य था इटली को एक
लोकतांत्रिक और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में एकीकृत करना। यह संगठन इटली के युवाओं
के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ।
2. एकीकरण का आदर्श: माज़िनी का मानना था कि इटली को
स्वतंत्र और एकीकृत बनाने का एकमात्र तरीका यह है कि उसे विदेशी शक्तियों (विशेष
रूप से ऑस्ट्रिया) से मुक्त किया जाए। उन्होंने इटली के लोगों को एकजुट करने और
उन्हें एक साझा राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बनाने की कोशिश की।
3. प्रेरणा स्रोत: माज़िनी ने न केवल इटली, बल्कि पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी
आंदोलनों को प्रेरित किया। उनकी विचारधारा ने कई अन्य देशों में भी राष्ट्रवादी
नेताओं और आंदोलनों को प्रेरित किया।
4. क्रांतिकारी प्रयास: माज़िनी ने इटली को स्वतंत्र करने के
लिए कई क्रांतिकारी आंदोलनों का नेतृत्व किया। हालांकि उनके प्रयासों में कई बार
असफलता भी मिली, लेकिन
उनकी दृष्टि ने इटली के एकीकरण के मार्ग को तैयार किया।
त्सॉल्जीपी
एस्फ़्रीनी का योगदान इटली के एकीकरण की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण था।
([k) काउंट कैवूर
- कैवूर इटली
के एकीकरण के प्रमुख नेता थे, जिन्होंने राजनैतिक और कूटनीतिक तरीकों से इटली को
एकजुट किया।
(x) यूनानी स्वतंत्रता युद्ध
- यह युद्ध
यूनानियों द्वारा ओटोमन साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए लड़ा
गया था और यूरोप के कई राष्ट्रों ने इसका समर्थन किया।
(?k) फ्रैंकफर्ट संसद
- यह जर्मनी के
एकीकरण के लिए पहली लोकतांत्रिक संसद थी, जिसने 1848-49 में जर्मनी के एकीकरण पर चर्चा की।
(Ä) राष्ट्रवादी आंदोलनों में महिलाओं की
भूमिका
- महिलाओं ने
इन आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया, संगठनों का गठन किया, विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया, और क्रांतिकारी गतिविधियों का
समर्थन किया।
2. प्रश्न: फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक
पहचान की भावना पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने कौन से कदम उठाए?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक
पहचान की भावना पैदा करने के लिए कई कदम उठाए, जैसे:
- फ्रांस को पितृभूमि (La Patrie) और नागरिकों को नागरिक (Le Citoyen) कहा।
- फ्रांसीसी
भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में लागू किया। - नए झंडे, राष्ट्रीय गीत, और नए कैलेंडर की शुरुआत की।
3. माजिनी और गैरीबाल्डी कौन थे? किस प्रकार उन्हें चित्रित किया गया और
उनका महत्व क्या था?
उत्तर: माजिनी और गैरीबाल्डी इटली के
राष्ट्रवादी नेता थे:
- माजिनी: माजिनी ने इटली को एकजुट करने के
लिए ‘यंग इटली‘ आंदोलन शुरू किया। - गैरीबाल्डी: गैरीबाल्डी ने अपनी सेना ‘रेड शर्ट्स‘ के साथ दक्षिणी इटली को स्वतंत्र
कराने में मदद की। दोनों का इटली के एकीकरण में बड़ा योगदान था।
4. जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का
संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर: जर्मनी का एकीकरण ओटो वॉन बिस्मार्क के
नेतृत्व में हुआ, जिन्होंने ‘ब्लड एंड आयरन‘ की नीति अपनाई। उन्होंने ऑस्ट्रिया और फ्रांस के खिलाफ
युद्ध लड़कर जर्मन राज्यों को एकजुट किया और 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना की।
5. नेपोलियन ने अपने शासन में कौन से
परिवर्तन किए जिससे प्रशासन अधिक संगठित हो गया?
उत्तर: नेपोलियन ने अपने शासन के दौरान कई
महत्वपूर्ण परिवर्तन किए, जैसे:
- नेपोलियन कोड लागू किया, जिसने नागरिक स्वतंत्रता और समानता
को बढ़ावा दिया। - कर प्रणाली
और प्रशासनिक ढांचे को पुनर्गठित किया। - पूरे यूरोप
में फ्रांसीसी कानूनी और प्रशासनिक प्रणाली को लागू किया।
1. प्रश्न: उदारवादियों ने 1848 की क्रांति का क्या अर्थ निकाला? उदारवादियों ने किन राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विचारों को बढ़ावा
दिया?
उत्तर:
उदारवादियों ने 1848 की क्रांति से यह सीखा कि राजनीतिक
अधिकार और स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए केवल राजनैतिक आंदोलन ही पर्याप्त नहीं
है। उन्हें यह भी समझ आया कि समाज के विभिन्न वर्गों के समर्थन के बिना क्रांति
सफल नहीं हो सकती। उदारवादियों ने निम्नलिखित विचारों को बढ़ावा दिया:
- राजनीतिक
विचार: संवैधानिक
सरकार, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की
मांग। - सामाजिक
विचार: समानता, शिक्षा का अधिकार, और समाज में सभी वर्गों के लिए समान
अवसर। - आर्थिक विचार: मुक्त व्यापार, श्रमिकों के अधिकार, और आर्थिक स्वतंत्रता की पैरवी।
2. प्रश्न: यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास
में संस्कृति के योगदान को दिखाने के लिए तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
यूरोप में
राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान था। इसके तीन उदाहरण हैं:
- भाषा का
योगदान: राष्ट्रवादियों
ने अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दिया और राष्ट्रीय एकता के लिए इसे एक पहचान के
रूप में इस्तेमाल किया। उदाहरण के लिए, जर्मनी में जर्मन भाषा और साहित्य का विकास
राष्ट्रवादी भावनाओं को जागृत करने में सहायक था। - साहित्य और
लोककथाएँ: कई देशों के
कवियों और लेखकों ने राष्ट्रीय गर्व और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाने के लिए
साहित्य और लोककथाओं का उपयोग किया। उदाहरण के तौर पर, पोलैंड में अतीत की महानता को
दिखाने वाले साहित्य का निर्माण किया गया। - संगीत और कला: राष्ट्रवादी संगीत और कला ने लोगों
को एक साथ लाने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में मदद की। उदाहरणस्वरूप, हंगरी में राष्ट्रवादी संगीतकारों
ने हंगेरियन लोक संगीत को लोकप्रिय बनाया।
3. प्रश्न: दो देशों का उदाहरण देते हुए
समझाएँ कि उन्नीसवीं सदी में राष्ट्रवाद किस प्रकार विकसित हुआ।
उत्तर:
- जर्मनी: जर्मनी में राष्ट्रवाद का विकास 19वीं सदी के मध्य में ओटो वॉन
बिस्मार्क के नेतृत्व में हुआ। बिस्मार्क ने “ब्लड एंड आयरन” नीति
के तहत युद्धों और कूटनीति के माध्यम से जर्मन राज्यों को एकजुट किया। 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना
हुई। - इटली: इटली में राष्ट्रवाद का विकास
ग्यूसेप्पे माज़िनी, गैरीबाल्डी
और काउंट कैवूर के प्रयासों से हुआ। माज़िनी ने यंग इटली आंदोलन की शुरुआत की
और गैरीबाल्डी ने दक्षिणी इटली को स्वतंत्र कराने में मदद की। कैवूर ने इटली
को एकजुट करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए।
4. प्रश्न: फ्रांस में राष्ट्रवाद का इतिहास
बाकी यूरोप से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
फ्रांस में
राष्ट्रवाद का इतिहास बाकी यूरोप से अलग था क्योंकि फ्रांस में राष्ट्रवाद की
शुरुआत 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से हुई थी। यह
क्रांति पूरी तरह से जन आधारित थी और इसमें स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व के आदर्शों को केंद्र में रखा गया। इसके विपरीत, बाकी यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय अक्सर
राजाओं और नेताओं के नेतृत्व में हुआ, जैसे जर्मनी में बिस्मार्क और इटली में कैवूर। फ्रांसीसी
क्रांति ने पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रेरित किया, लेकिन फ्रांस में यह आंदोलन जनता की ताकत
से संचालित था।
5. प्रश्न: बाल्कन देशों में राष्ट्रवादी
विद्रोह क्यों हुए?
उत्तर:
बाल्कन देशों में
राष्ट्रवादी विद्रोह इसलिए हुए क्योंकि ये क्षेत्र ओटोमन साम्राज्य के अधीन थे और
यहाँ के लोग अपनी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसके
अलावा, बाल्कन क्षेत्र में विभिन्न जातीय समूह
थे, जो अपनी-अपनी राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा
देना चाहते थे। बाल्कन राष्ट्रों ने यूरोप के अन्य स्वतंत्र राष्ट्रों से प्रेरणा
लेकर अपने राष्ट्रवादी आंदोलनों को तेज किया।
6. प्रश्न: यूरोप के बाहर के देशों में
राष्ट्रवादी विचारों और आंदोलनों का अध्ययन करते हुए एक या दो देशों पर ध्यान दें, जो यूरोप के राष्ट्रवादी विचारों से अलग
थे।
उत्तर:
- भारत: भारत में राष्ट्रवाद का उदय ब्रिटिश
उपनिवेशवाद के खिलाफ हुआ। यहाँ राष्ट्रवादी विचार स्वतंत्रता, स्वशासन, और सामाजिक सुधारों के आसपास
केंद्रित थे। महात्मा गांधी और अन्य नेताओं ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम
से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया, जो यूरोप के हिंसक राष्ट्रवादी आंदोलनों से भिन्न था। - चीन: चीन में राष्ट्रवाद का उदय विदेशी
प्रभावों और उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष के रूप में हुआ। चीन में राष्ट्रवाद
का केंद्र चीनी सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सम्राटों की शक्ति की बहाली पर था।
सन यात-सेन के नेतृत्व में चीन में क्रांतिकारी आंदोलन हुआ, जो यूरोप के राष्ट्रवाद से भिन्न
था।